Wednesday, July 22, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- शिकवा नहीं

रचनाकार - उर्मिला सिदार
ग्राम - बुलांकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक-  *शिकवा नहीं*
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                *शिकवा नहीं*
शिकवा नहीं किसी से मुझे,
             कभी शिकायत भी नहीं, 
जीवन समझ नहीं आया,
                  सुख तो मिला नहीं।

शरीर को ही श्रेष्ठ मानकर,
             जिंदगी भर धन कमाया,      
 भौतिकता में डूबा रहा,
        मुझे जीवन समझ न आया। 
शिकवा नहीं...............

जीवन का अर्थ मुझे,
                 अब समझ में आया।  
जब तक समझ आया,
      मेरा सुकून का पल छूट गया।
शिकवा नहीं..................

जीवन को कभी समझने की,
                   जिज्ञासा ही न रहा, 
 भौतिकता की चाहत में,
           मेरी खुशियां ही लूट गया।
शिकवा नहीं.................
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                          उर्मिला सिदार
                           रायगढ़ (छग)

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