स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा- लेख
शीर्षक -- पछतावा
व्याख्या -लेखक के द्वारा अपने विद्यार्थी जीवन के एक घटना का वर्णन किया गया है जिसका आज भी पछतावा है ।
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पछतावा
विद्यार्थी जीवन बड़ा ही श्रेष्ठ जीवन।यह लेख मेरे विद्यार्थी जीवन के समय का है ।उस समय मैं कक्षा सातवीं में पढ़ रहा था । मेरे सहपाठी मित्रों में हम लोग छः सात विद्यार्थी थे जो एक साथ घुमना कक्षा में एक साथ रहना आपस में विचार विमर्श करना लघु अवकाश एवं दीर्घ अवकाश में भी हम लोग साथ -साथ रहते थे । एक दो बार हम लोग विद्यालय से ही किसी को बिना बताए फिल्म भी देखने के लिए चले गए थे ।
मेरे मित्रों में जेमिनी गणेश चौहान, रोहित कुमार गबेल, तिरीथ राम यादव, सैय्यद अब्दुल मुनीर, सैय्यद अब्दुल वहीद, सैय्यद अब्दुल असगर और मैं गिरधारी लाल चौहान छुट्टी होने के बाद सब अपने अपने घर जाते थे तब अलग होते थे । पढ़ाई के बारे में तो मैं नहीं कह पाऊंगा कि कौन ज्यादा होशियार था । लेकिन उपस्थिति हम सब की आसपास ही रहती थी बिना कारण हम कभी विद्यालय में अनुपस्थित नहीं रहे ।
वार्षिक परीक्षा चल रही थी परीक्षा में एक विद्यार्थी नकल कर रहा था । मैं नकल करने वाले उस विद्यार्थी के बारे में शिकायत कर दिया कि ये लड़का नकल कर रहा है कहकर ।जो शिक्षक वहां पर ड्यूटी कर रहे थे उनके द्वारा पकड़ लिया गया ।उसका नकल प्रकरण बन गया और वार्षिक परीक्षा में वह अनुत्तीर्ण हो गया ।हम सब मित्र पास हो गये ।पढ़ाई का क्रम जारी रहा ।पढ़ाई पूरी हो गई ।अब उस समय की घटना मुझे बार बार याद आता है जब उस लड़के से मुलाकात होती है तब अक्सर ।
मन दुख से भर जाता है मैं सोचता हूं अगर नहीं बताया होता तो क्या होता हमारा और उसका जीवन कैसा होता।इस बात का मुझे बहुत ही। पछतावा है मैं,सही किया या गलत किया मैं नहीं जानता । लेकिन यह मेरे जीवन में घट चुका है । मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि मुझे इस प्रकार के कार्यों से बचाना । और मुझे क्षमा प्रदान करना ।
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