निवास--रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
जिला--रायपुर ।
शीर्षक--""अन्ना हजारे """
विधा-छ्न्द-मुक्त,कविता ।
(कहीं धूप कहीं छाँव ,मुहावरा)
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***अन्ना हजारे ***
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क्यों तड़पता है मन ,किसी का,
जो कर जाते हैं,ऐसे कारनामे ,
उनकीं एक आवाज ---
हजारों दिलों की आवाज़ बन जाती,
और एक साथ कई-दीपों की रोशनी होती ,
तो,कहीं धूप कहीं छाया होती ।01।
----क्यों तड़पता है मन,किसी का---
कहीं धूप कहीं छाया,
सादगी की है काया,
साहस,धैर्यता का ,ऐसा दम है पाया,
सत्य -अहिंसा को अपनाया,
राष्ट्रीय चेतना में,सुख -शांति का पाठ-पढ़ाया,
बेईमानी-भ्रष्टाचारी मिटाना है,
लोकपाल बिल का मुद्दा उठाया है ।02
----क्यों तड़पता है ,मन किसी का----
देखो कहीं धूप कहीं छाया है,
खाली हाथ आया,खाली हाथ जायेगा,
प्राण चले जाये,पर,वादा भी निभाएगा,
जो सोचा है देश हित में,
कर के दिखाना है----
आओ तुम भी ,आगे बढ़ते जाओ,
और मेरे साथ,कदम दर कदम बढ़ाते जाओ,
यह एक जनहित का मुद्दा है---
तुम्हें भी,समर्थन में,मुहर लगाना है।03
---क्यों तड़पता है,मन किसी का----
वन्दे मातरम् ,लोकतंत्र अमर रहे--
ऐसा उद्घोष ,सारे देश में फैला रहे,
आज ,अन्ना हजारे,तुमको पुकारे ,
पर दिख रहा है,कहीं धूप कहीं छाया रे।04।
---क्यों तड़पता है मन,किसी का---
************इति ************
व्याख्या:--उपरोक्त रचना में रचनाकार द्वारा यह कहना चाहता है कि अन्ना हजारे के आंदोलन की पृष्ठभूमि पर ध्यान केंद्रित करते हुए दिशा-बोध कराने की कोशिश की है ।
÷÷÷÷÷मौलिक-प्रस्तुति:----
**एच-एस-अरमो,रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
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