रचनाकार-एच-एस-अरमो" अरमान "
स्थान-बैरन बाजार,रायपुर ,छ.ग-।
जिला--रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक--हरेली पर्व ।
विधा---कविता (छन्द -मुक्त)
हरेली पर्व
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वर्षा ऋतु का मौसमी बहार,
लेकर आया,पहला त्यौहार,
आज होत,कृषि औजारों की पूजा,
घरों में बनते,परंपरागत पकवान,
गुरहा चीला और बड़ा-सुहारी,
गली-मुहल्ले,खेलत गेड़ी,पाड़े किलकारी ।
आज के दिन लाते जंगली हरियाली,
कन्द-मूल,जड़ी-बूटी ,बैगा और पुजारी
करते उसकी सिद्धि और पूजा,
इसका फल और महत्व,आज होवे दूजा ।
आते ही,सावन का महीना,
करते कांवरिया,शिवजी की पूजा,
आई एक साथ,हरेली व सोमवती अमावस्या ,
होता आज का, महत्व दूजा ।
सावन-महीना,बरसे रिमझिम फुहार,
सावनी झुलों की,लग जाती कतार,
कहीं-कहीं बाढ़ की,विनाशकारी मार,
कहीं होती,जन-धन की हानि अपार,
दिखे,खेत-खार,जंगल में हरित बहार।
अन्धविश्वासों का,होवे डेरा-बसेरा,
रात्रि में,तांत्रिक-मान्त्रिकों का फेरा,
निर्जन-स्थलों में,करते हैं,जपेरा,
नज़र लगने से जो है बीमारा,
झाड़-फूंक करता बैगा,अपने डेरा ।
ये कुप्रथा ,लोगों को,डाराये भारी,
टोनही-महिला होवे,ये बात है जारी,
शक में,करें उसकी हत्या,है ये बीमारी,
बना सरकारी कानून इसके खिलाफी,
टोनही प्रथा प्रताड़ना-2005 है जारी।
आओ हम तुम,हरेली पर्व पर---
कुछ तो संकल्प करें,
वृक्षारोपण व किसानों का,सम्मान करें,
टोनही कुप्रथा को,समाज से दूर करें ,
बिमारियों का ईलाज,डाँक्टर से करावें,
समाज से,अन्धविश्वास को जड़ से मिटायें ।
==========इति==========
***मौलिक-प्रस्तुति-अरमो,रायपुर ।
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