Thursday, July 23, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- जिंदगी का सफर

रचनाकार -उर्मिला सिदार
ग्राम - बुलाँकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - (कविता)मुक्त छंद
शीर्षक - जिंदगी का सफर
दिनांक-  23/07/ 2020
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          *जिंदगी का सफर* 

समझ कर जीने से,
जिंदगी का सफर,
बड़ा सुहाना होता है।
नासमझी में जीने से,
बेशुमार जिंदगी में,
जीवन बेगाना लगता है।

जिंदगी का सफर,
अपने से ही शुरू होता है।
इस जिंदगी की सफर में,
स्वयं को समझना होता है।
स्वयं समझ में आने से ही,
आगत की सफर शुरू होता है।
समझ कर जीने...............

आगत जिन्दगी का सफर ,
घर परिवार से होता है।
जहांँ समृद्धि का भाव,
सबंधों में प्यार होता है।
समाधान- समृद्धि ही उसका,
जीने का आधार होता है।
समझ कर जीने............

अपना पराया दीवार तोड़,
अनन्य भाव में जीता है।
उपयोगी हो ,सम्मान से,
समाज में जीना होता है।
जिंदगी का हर लम्हें,
हर क्षण सार्थक होता है।
समझ कर जीने...........

समझ कर जीने से,
जिंदगी का हर सफर,
बड़ा सुहावना लगता है।
नासमझी में.............

व्याख्या - कवित्री इस कविता में जिंदगी का सफर के बारे में व्यक्त करती हुए कहती हैं ,कि जिंदगी समझकर जीने से ही सुहाना लगता है। नासमझी में जीने से बेहिसाब और जीवन पराया लगता है। जिंदगी की शुरुआत अपने से ही होता है ।जब व्यक्ति अपने को समझ जाता है, तो परिवार के साथ संबंधों में भावों, प्यार के साथ जीता हुआ परिवार में समृद्धि का भाव महसूस करता है एवं समाज में अपना पराया का दीवार खत्म कर, सभी को अपना समझ कर, उपयोगी होकर, समाज में हर- पल, हर-क्षण सम्मान के साथ जीता, वह अपने जीवन की सफर को सार्थक बनाता है।यही तक मनुष्य की शरीर यात्रा है। अतः हर मनुष्य को अपनी जिंदगी में सार्थकता के  साथ सफर करना चाहिए।
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                        उर्मिला सिदार
                        रायगढ़ (छग)

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