Thursday, July 23, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- सफर

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
         संबलपुर,जिला-कांकेर
    विषय :- *सफर*
  
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  ~ •°•० *सफर* ०•°• ~

जीवन का सफर 
कठिन बड़ा 
चल सको तो चलो।

धूप मिलेगी ,काँटे मिलेंगे
पग-पग पर बाधाएं 
तुम्हें रोकेंगी 
बढ़ सको तो बढ़ो।

मंजिल दूर खड़ी
मुस्कुरा रही है,
ठोकरें लगेंगी तुम्हें 
सह सकोगे तो सहो।

जिंदगी का कोई 
ठिकाना नहीं,
विपदाओं में राह 
चुन सको तो चुनो।

मुस्कुराहटें यूँ ही नहीं 
अधरों को सजाती,
आँसूओं के बीच से 
हँसी के पल 
चुरा सको तो चलो।

परिवार का सुख 
बहुत बड़ा होता है,
अकेले जिंदगी 
तय कर सको तो चलो।

कुछ कर सको 
तो आगे बढ़ो,
जिम्मेदारियों के बीच 
अपने को खपा सको 
तो चलो।

जीवन का सफर 
बड़ा कठिन है 
बढ़ सको तो बढ़ो।
धूप मिलेगी,काँटे मिलेंगे  
चल सको तो चलो।

व्याख्या-उपरोक्त कविता में जीवन का सफर कठिनाईयों से भरा है।तमाम विपरित परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ने की बात कही गई है।
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     नलिनी बाजपेयी
सम्बलपुर,कांकेर (छ.ग.)

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