स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता (कोरोना एवं उसके प्रभाव श्रम क्षेत्र में बेकारी,)
शीर्षक -- सब कुछ छीना कोरोना
व्याख्या -कवि के द्वारा कोरोना के प्रभाव एवं बेरोजगारी का वर्णन किया गया है ।
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सब कुछ छीना कोरोना
हाय! हाय!कोरोना , जीवन में ला दिया तूने रोना ।
अच्छा खासा चल रहा था, दुखों को पड़ गया ढोना ।
घर से शहर गये थे हम,
शहर में रोजगार मिला ।
रोजगार से आमदनी थी,
तेरे कारण गया छीना ।
अब बरोजगार हम हो गये, रोजगार पड़ गया खोना ।
हालत अपनी हो गयी पतली
घर से निकलना हो गया बंद।
घर के बाहर कानून का डंडा,
घुमते कानून वाले चंद ।
घर से निकलो मास्क में, जरुरी सामाजिक दूरी का होना ।
एक ओर बीमारी फैलने का डर,
दूसरी ओर रोजी रोटी बेरोजगारी का जहर ।
चारों तरफ बंद गांव नगर शहर,
रोजमर्रा की वस्तुओं का मिलना दूभर ।
थी कुछ पूंजी खत्म हुए, बिक गए थे कुछ चांदी सोना ।
आवागमन पूरी बाधित,
शादी ब्याह मरण प्रतिबंध ।
मंदिर मस्जिद सब पर ताले,
स्कूल कालेज का टूटा सबका संबंध ।
घर बैठे लोग बीमार हो रहे,कोरोना के बने खिलौना ।
देश में लाक डाउन कानून आया ,
सबने उसको है अब भी अपनाया ।
कोरोना के आकड़े फिर भी न कम ,
डाक्टर नर्स पुलिस का निकला जाता दम ।
फैल रहा है दिनों दिन नेता मंत्री परेशान कोने से उस कोना ।
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