दिनांक। 21जुलाई२०२०
शीर्षक। रक्तबीज
रचनाकार। श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
जिला। रायपुर छत्तीसगढ़
विधा मुक्त छंद
रक्तबीज.............
रक्ताभ,रतनार,रक्तिम,
दहकते, धधकते आग से।
रक्तबीज तुम्हे मैं आज,
बो ही देती हूं...........।
जंगलों के पेड़ों पर,
पेड़ों के फूलों पर।
ताकि तुम दिखते रहो,
मीलों दूर से..............।
इसलिए भी कि,
जंगलों में चुपचाप,
आग भी उगते हैं,
और चूल्हे की जोय भी.....।
खींच कर तुम,
जिजीविषा की परिधि,
खत्म नही हो सकते,
मानुष के भीतर..............।
अस्थि मज्जा की खोह में,
जंगलों की खोह में,
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