Friday, July 10, 2020

रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना- कोरोना महामारी, भूख पर भारी

रचनाकार- अजय पटनायक
स्थान- डोलेसरा, रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय- वैश्विक महामारी कोरोना के प्रभाव और श्रम क्षेत्र में बढ़ती बेगारी
शीर्षक- कोरोना महामारी भूख पर भारी
विधा- गीत 

*कोरोना महामारी भूख पर भारी*
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कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो।
चूल्हे की ज्वाला राख हो चुकी,भूख से चीखती हुंकार सुन लो ।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो......

घर के दरवाजे जेल बने हैं,                    
गरीबी हमारे खेल बने हैं। 
बाट जोहते नैन थके,अब
बच्चों की चीत्कार सुन लो।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो......

 मिलता अब कोई दाम नहीं,कोई ठिकाना  नाम नहीं।
 दो जून की रोटी भारी,होती अब दुत्कार सुनो लो।।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो.....

 डर लगता अब शहरों से,महामारी के कहरों से। 
खोल ताला अब  गांव चलूँ मै,जन्म भूमि का प्यार सुनो लो।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो......

 भूख का दरिया गहरा है,बाहर तालाबंदी का पहरा है। 
अन्न अर्थ सब रूठ गए हैं,विपदा का ये मार सुन लो।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो......

खुली कोई बाजार नही है,पैसे भी  दो चार नही है।
हाथ फैलाने निकलें कैसे,कानून का ये मार सुन लो।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो......

 रूखी सूखी खाऊंगा ,अब
 घर में ही रह जाऊंगा।
सपना का अधिकार नही है,किस्मत से हूँ लाचार सुन लो।।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो.....

मैं दिहाड़ी मजदूर हूँ,पेट के लिए मजबूर हूँ। 
जठर की अग्नि मार ना दे,कोरोना से पहले मेरी उपचार सुन लो।
कोई तो पुकार सुन लो,ये मेरे सरकार सुन लो.......

              मौलिक रचना
            अजय पटनायक

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