रचनाकार - ओमप्रकाश साहू "अंकुर "
निवास - सुरगी, छत्तीसगढ़
जिला - राजनांदगांव
शीर्षक -"पर्रा भर लाई "
विधा - कविता (छन्द मुक्त)
पर्रा भर लाई
अगास मा दिखथे चन्देनी,
उही ला कहिथे पर्रा भर लाई.
चन्दा के सिपाही हरे पर्रा भर लाई,
एकर कहानी सुनाथे बबा अऊ दाई.
सुग्घर चन्दा अऊ चन्देनी मिलके,
घूप अंधियार ला दूर करथे भाई .
पर्रा भर लाई दुनिया भर छरयाई,
ये गजब सुग्घर गाना हे बहिनी -भाई.
भावार्थ - आसमान में जो तारे दिखाई देते हैं उसी को पर्रा भर लाई कहते हैं. यह चन्द्रमा का सहयोगीगण है. चन्द्रमा और तारे मिल कर अंधेरा को दूर करते हैं. दादा दादी इसके बारे में कहानी सुनाते हैं. पर्रा भर लाई, दुनिया भर छरयाई छत्तीसगढ़ अंचल में यह गाना बच्चों के बीच बहुत ही प्रसिद्ध है.
सुग्घर ....अंकुर जी
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