Wednesday, July 8, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- पर्रा भर लाई

कवयित्री-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-पर्रा भर  लाई
विधा -कविता (मुक्त छंद)

मिठाई चबैना खाते- खाते,
याद आई बचपन की दाई।
करी लड्डू , गुलगुल भजिया 
और  वही पर्रा भर लाई।।

चांद- सितारे आसमां पर बिखरे,
सब मिल कर जग का तम हरते,
फैले चहुं ओर  सारे नील गगन में,
लगते  हैं ज्यों पर्रा भर लाई।।

आओ सीखें मिल जुलकर रहना,
और एक दूसरे का सहयोग करना
दुःख में यूं हम एकजुट हो जाएं,
ज्यों रहता है पर्रा भर लाई।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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