Wednesday, July 22, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की कविता:- सूरज

रचनाकार-मीरा आर्ची चौहान
जिला- कांकेर,छग
शीर्षक-  *सूरज*
विधा-कविता (मुक्त छंद)

जो अडिग पिंड बन खड़ा रहा,
बादल ग्रहण के महा शूलों में।

जिसने जग परिवर्तन  देखी है,
अपने अटल निष्पक्ष उसूलों में।

प्रतिबिंबित है जो सारे जगत में,
वनस्पतियों व सभी प्राणियों में।

जीवन -मृत्यु का जिनसे नाता है,
जो डरा न कभी   भी हिलोरों से।

उस सूरज पर गर्व मुझे बहुत है,
जो लड़ता अकेले हीअंधेरों से।

जिसका अस्तित्व हो महाकाव्य,
वो क्या बंध सके इन लकीरों से।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग

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