Wednesday, July 8, 2020

रायगढ़ से गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न" की रचना- पर्रा भर लाई

रचनाकार-गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विषय-लोकोक्ति "पर्रा भर लाई" संबंधित
विधा-छंद मुक्त
शीर्षक- *बिछागे परेम के पर्रा भर लाई*
**************************
  " बिछागे परेम के पर्रा भर लाई"

रतिहा पहागे थोरेक बांचे हे अंधियारी,
चिटिक अटक ओ,मोर संग चलव संगवारी ।
जम्मो जावत हावय जउन रद्दा,
धीरज धरव ए हर ए मन के बैमारी ।।
कहो संगी कउन करे अगुवाई...
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

जीवन के का मोल हे,
ऊंच-नीच अउ आनी-बानी के तोल हे ।
मीठ बोली हे गहना संगी,
क गुणधानी मा का तोर बोल हे ।।
देखव कइसे महके हे अमिया के अमराई.....
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

अरपा-महानदी के कल-कल पानी,
नंदा गे उही डोकरा बबा अउ डोकरी नानी ।
किसान जोते खेत ला कि खेत जोते किसान ला,
कछु समझ नई आए एहर कइसन ए किसानी ?
माटी पूत के लाज राखे हे मां समलाई.....
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

बेरा पहागे सपना सिरागे,
छारा देवत हे कनिहा धरे महतारी ।
जइसन मरनी के तइसन करनी,
पीठ मा परही समे के तुतारी ।।
नानकुन लईका मन के का लड़ना अउ का लड़ाई.....
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

सत के साथ हो ही त जीवन पार हो ही,
नई तो दुख हर जीवन भर मुड़ कपार हो ही ।।
धीरज ला गठियाए रबे,
झुके ले ही तोर बर समन्दर पार हो ही ।।
लूटमार के पइसा जाथे लूट लूटाई....
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

नौ महिना गरभ म रहे मितान,
खाए पिए सुते अउ तन-तन-तान ।
जनम सिरा जही करजा चुकाए बर,
भगवान के नई करे सकस तंय बखान ।।
सिरतोन संगी दई हर देही दुआ अउ दुहाई.....
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

मनखे के नई ए कउनो ठिकाना,
जूड़-सरदी के नई चले रे अउ बहाना ।
मन कसमसाए कसम से,
धइन-धइन रे मनखे म मनखे के नंदाना ।।
चलो सुने बर जाबो उही डोकरी-दाई...
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई.....

का जुग आगे सब जुगत मा लगे हे,
अमीर के अमीरी अउ गरीब भुगत मा लागे हे ।
महमारी के परकोप देख,
सब एके घर मा फईका दे सुखत मा लगे हे ।।
का करम के करनी अउ का धरम के कमाई....
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

संसार के सार जाने र,
समे हे बलवान ए माने र ।
कछु पाए बर कछु गंवाए बर पड़ही,
सुख के चादर ला अइसने झन ताने र ।।
देख पूरब के पुरवा अउ गमकत हे पुरवाई......
बिछागे परेम के पर्रा भर लाई....

**************************
गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"

3 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...