जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---शिक्षा के बदलते प्रारुप पर आलू लेख
शीर्षक --शिक्षा से जुड़े रोजगार
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शिक्षा जुड़े रोजगार से
शिक्षा का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है शिक्षा से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण होता है । शिक्षा के अनुसार ही व्यक्ति अपने कार्य का सम्पादन करता है।
प्राचीन काल में शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी वर्ग के अनुसार शिक्षा की व्यवस्था थी ।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में शिक्षा एवं शिक्षा पर कार्य किए गए प्रारंम्भ में पुरुष ही शिक्षा प्राप्त करते थे नारियों को यह अधिकार प्राप्त ही नहीं था ।किन्तु बाद में परिवर्तन हुआ और सम्मान रुप से नारियां भी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।अधिकार प्रदान किया गया ।आज सह शिक्षा पर योजनाएं बनाई एवं क्रियान्वित की जा रही है ।
बदलते समय में शिक्षा के उद्देश्य में परिवर्तन हुए हैं
शिक्षा एक ऐसा माध्यम बना है जो व्यक्ति को सामाजिक एवं सांस्कृतिक वैचारिक स्वतंत्रता प्रदान करती है ।
आज का युवा भारत का भविष्य है ।उसकी समुचित शिक्षा से ही भारत का भविष्य है।
भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली को परतंत्र काल की शिक्षा प्रणाली माना जाता है ।यह ब्रिटिश शासन की देन मानी जाती है ।इस प्रणाली को लार्ड मैकाले ने जन्म दिया ।उनका मकसद था शासन चलाने के लिए कुछ कलर्क चाहिए और वैसा ही नींव डाली गई। उन्हें सफलता भी प्राप्त हुआ ।आज भी कार्यालयों में बाबू बनकर सेवाएं देने को लोग गौरव की बात समझते हैं ।
आज शिक्षा के विकास के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही है । और उसका लाभ ले रहे हैं । लोगों को रोजगार मिले शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है । जिससे शिक्षा प्राप्त करके कोई बेरोजगार न हो और शिक्षा के प्रति लोगों में आकर्षण बने ।
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