विधा - छंद मुक्त
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _जिस पल मे तुम साथ होते हो |
जिस पल मे तुम साथ होते हो |
खास होते है |वो पल जिस मे पल तुम साथ होते हो |
कुछ पाने की इच्छा नही होती ज़ब पास होते हो |
कुछ शेष नहीं रहता |शेष पूर्ण कर जाते हो |
जीवन के कुछ पल हमारी दुनिया महका जाती है |
हाँ तुम्हारा साथ मुझे बहका जाती है |
खास होते है |वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
बस देखूँ ये चेहरा जो मन को भाती है |
यही आशा मन मे दिवस - रैन रहती है |
खास होते है| वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
हर बात पे तुम्हारी बात आती है |
तुम हो तो दुनिया जन्नत लगती है |
खास होते है |वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
खट्टे मीठे यादो के साथ ज़ब |
हवा तुम्हारी याद दिलाती है |
हाँ |उस पल सारी कायनात मे,
तुम्हारी ही छवि नजरो मे दिखती है |
खास होते है वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
पल, पल मे बदल जाता है |
हर गम ख़ुशी मे बदल जाता है |
आपकी की मुस्कुराहट को देख हर शिकायत |
हंसी मे बदल जाती है |
खास होते है |वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
सपने भी सच हो गए लगते है |
अरमान पँख लगा उड़ते है |
खास होते है| वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
खास होते है |वो पल जिस पल मे तुम साथ होते हो |
भावर्थ - प्रीतम का साथ ही प्रेयसी के मन के भावो को बदल देता है |
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