जिला बेमेतरा (छ ग)
विधा कविता
शीर्षक "कले चुप गोठियाबे"
कले चुप गोठीयाबे संगी,
ये हे राज़ के बात।
काबर के दीवार के,
भी होथे संगी कान।
सुन मोर संगी तै बिहिनिया,
आबे नदिया पार।
उहां ले लेजाहुं तोला,
ये दुनिया के पार।
उहा बसाबो हमन संगी,
अपन घर संसार।
रहिबो हमेशा साथ साथ,
अ ऊ अपन मया ला बढ़ाबो।
रचबो नवा इतिहास संगी,
बनाबो नवा संसार।
संगे संग जीबो अ ऊ मरबो,
इहि हमर परिणाम।
कले चुप गोठियाबे संगी,
ये हे राज़ के बात।
काबर के दीवार के,
भी होथे संगी कान.....
सूर्य प्रकाश पाटिल
बहुत सुन्दर कविता 👌
ReplyDeleteGood bhai
ReplyDeleteबहुत सुन्दर लेख
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