Monday, June 15, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कमार ठाकुर की रचना-

उत्प्रेक्षा अलंकार
***********************************
रचनाकार  --  प्रवीण कमार ठाकुर
जिला  --  राजनांदगाँव (छ.ग.)
शीर्षक --  तेरी सूरत मानो चाँद हो
विधा   --  उत्प्रेक्षा अलंकार (कविता)
***********************************
।।१।।
तेरी  सूरत  मानो चाँद हो ,
               जुल्फ है तेरी काली घटा ।
लट  छुटे  ज्यौं  चेहरे पर ,
               देखते  बनती  है  छटा  ।

***********************************
।।२।।
बिंदिया  ऐसे  ललाट  पर ,
               मानो सूर नभ पर चमके ।
उज्वल ऐसे रुप हो मानो ,
               चंद्र  बदन  ज्यौं  दमके  ।

**********************************
।।३।।
नैन  हो  ज्यौं  झील  गहरी  ,
               देखते  ही  डूब  से  जाते हैं ।
या नीलांबर  के आंचल  में ,
               ज्यौं  दो  मोती  मुस्कातें हैं 

**********************************
।।४।।
हरितिमा वसन शुक  होत भ्रम ,
               तुम  मंजुल  मंजुल  हो  लगती ।
श्वेत  दंत  है  , अधरों  के  मध्य ,
               मानो  कोई कीर चबाए है मोती ।

***********************************
रचनाकार 
प्रवीण कुमार ठाकुर
पतोरा,छुरिया,राजनांदगाँव(छ.ग.)
***********************************
***********************************
व्याख्या :--
                     प्रस्तुत कविता में रचनाकार ने
सम्पूर्ण पँक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार का  बडा़
मनोरम चित्रण करने का प्रयास किया है ।
 जहाँ पर उपमेय में सर्वत्र  उपमान  का  भ्रम
होता है ।
***********************************

4 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...