स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छन्द मुक्त कविता
शीर्षक -"क्या लिखूंं"
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क्या लिखूं..........…
आज देश की हालात लिखूं
या बह रहे आँसुओ की तादात लिखूं
तुम्हारी वेदना और चीख़ों का सैलाब लिखूं
या मर चुकी मानवता का अंतिम सांस लिखूं
क्या लिखूं....
गुजरी हुई उस रात का आईना साफ है
फिर भी ये दरिंदगी कियु माफ़ है
सोच कर ही रूह कांप जाती है
ये देश उन्हें सुरक्षा दे रहा है
क्या लिखूं.........
देश की जनता की हताशा और निराशा
या सत्ताधारियों से न्याय की आशा
डर है फिर सड़को पर दरिंदों की दरिंदगी छायेगी
फिर से इस पर राजनीति की जाएगी
दिल दुखता है आत्मा रोती है
क्या लिखूं......
आज मेरे शब्द भी शर्मसार हैं
अब भी समय और तारीख दी
जाएगी उन्हें जो सब जानते हैं
गुनाहगार हैं
क्या लिखूं........
आज शब्द भी निःशब्द है
और बेटियां स्तब्ध हैं
बस आँसुओ की धार है
और न्याय के लिए गुहार है
क्या लिखूं.......
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