जिला--जांजगीर-चाम्पा
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-मुक्त छंद
शीर्षक-दोस्त और दोस्ती
व्याख्या- कवि के द्वारा अपनी मित्रता का वर्णन किया गया है । साथ साथ रहने संस्कार विचार बचपन से लेकर बुढ़ापे तक देखने की बात कही गई है ।और आजीवन चलते रहने की कामना की गई है ।
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दोस्त और दोस्ती
दोस्त हमारा ,दोस्ती भी हमारी ।
जब तक जीयेंगे,....रहेगी जारी ।
फूलों में चलेंगे, लेकिन साथ हम ।
कांटों में पलेंगे, लेकिन साथ हम ।
एक नाम जेमिनी, दूसरा गिरधारी ।
सपने अलग है....., विचार भिन्न नहीं ।
कर्म अलग है ,.....संस्कार भिन्न नहीं ।
दोनों की नौकरी, दोनों की जिम्मेदारी ।
दूर रहते हैं, .......मन से दूर नहीं ।
सीधे साधे हम, .....मन गुरुर नहीं ।
चार दिन का जीवन,रहें क्यों भारी ।
देखा है बचपन,बुढ़ापा भी देख रहे ।
दुख भी झेला है,.. सुख भी पा रहे ।
ऐसे ही चलते,.......रहे अपनी यारी ।
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