Saturday, June 13, 2020

छत्तीसगढ़ के जाँजगीर-चाम्पा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- दोस्त

नाम-गिरधारी लाल चौहान
जिला--जांजगीर-चाम्पा
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-मुक्त छंद
शीर्षक-दोस्त और दोस्ती

व्याख्या- कवि के द्वारा  अपनी मित्रता का वर्णन किया गया है । साथ साथ रहने संस्कार विचार बचपन से लेकर बुढ़ापे तक देखने की बात कही गई है ।और आजीवन चलते रहने की कामना की गई है ।
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दोस्त और दोस्ती

दोस्त हमारा ,दोस्ती भी हमारी  ।
जब तक जीयेंगे,....रहेगी जारी ।

फूलों में चलेंगे, लेकिन साथ हम ।
कांटों में पलेंगे, लेकिन साथ हम ।
एक नाम जेमिनी, दूसरा गिरधारी ।

सपने अलग है....., विचार भिन्न नहीं ।
कर्म अलग है ,.....संस्कार भिन्न नहीं ।
दोनों की नौकरी, दोनों की जिम्मेदारी ।

 दूर रहते हैं, .......मन से दूर नहीं ।
सीधे साधे हम, .....मन गुरुर नहीं ।
चार दिन का जीवन,रहें  क्यों भारी ।

देखा है बचपन,बुढ़ापा भी देख रहे ।
दुख भी झेला है,.. सुख भी पा रहे ।
ऐसे ही चलते,.......रहे अपनी यारी ।

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