जिला - राजनांदगाँव
विषय- शहरीकरण
शीर्षक - गाँव बदल रहा है!
शहरीकरण के चक्कर में ,
रिस्ते -नाते बदल रहे है !
देखों मेरा गाँव बदल रहा है!
ना अब इंसान, इंसान रहा,
विश्वास के लोग मिलतें हैं कहाँ?
देखों अब इंसान बदल रहा है!
गाँव और शहर में कहीं नहीं है मेल!
गाँव में प्रेम की सागर बहती है!
और शहर में प्रेम का परिभाषा बदल रहा है!
गाँव अब गाँव नहीं लगता !
ढ़ूढ़ने पर कहीं गाँव नहीं मिलता !
क्योंकि आज मुकाम बदल रहा है!
क्या? यह गाँव का विकास है ,
या शहरीकरण एक दिखावा है !
या केवल लोगों का पहिचान बदल रहा है!
दूजराम साहू
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