जिला -बिलासपुर (छ. ग. )
शीर्षक -तू मुझे प्रेम करता है l
विधा -गीत, लावणी छंद (16, 14)
कहते भगवन भक्तों से सुन,
तू मुझे प्रेम करता है l
पर पीड़ा अपनाने भाई,
आगे नही निखरता है ll
प्रेम नाम है मेरा चेतन
अमर मन ताप हरता है l
बढ़ निज सोंच को करो पावन,
कोई नही बिखरता है ll
दाग लगा मानवता पर घन,
खालीपन जो भरता है l
प्रेम प्रयास करो तो हरदम,
मन को साध निडरता है ll
देख, परख,निज कदम बढ़ा सुत,
घृणा मति अति घिनौना है l
डोर मे बंध मुझ असीम से,
देखो मन वहीं ठहरता है ll
व्याख्या -प्रेम के बिना ईश्वर प्राप्ति संभव नही है. सबसे पहले हम मानव से प्रेम करेंगे तभी लौकिक प्रेम से अलौकिक प्रेम का द्वार खुलेगा l
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