Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना- प्रेम

रचनाकार:- अजय पटनायक
जिला:- रायगढ़ ,छत्तीसगढ़
विषय:- प्रेम
शीर्षक:- प्रेम की परिभाषा
विधा:- मुक्तक 

*प्रेम की परिभाषा*
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है प्रेम पूजा की हवन, त्याग तप बलिदान है।
मन मृगतृष्णा तो ,हृदय
शैल समान है। 
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 प्रीत रीत की निशब्द भाषा,जीवन की हर आशा है।
नित नए सम्बन्धो की रचना,रचती अनमोल परिभाषा है।।
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श्रावण कुमार की प्रेम विपाशा, हर मात पिता को अर्पण है ।
भरत- राम की भातृत्व प्रेम ,युगों युगों का दर्पण है।।
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मौत से मीत लगा कर्ण ने,मैत्रीय प्रेम की लिख दी गाथा।
धोकर पांव कृष्ण ने,सुदामा की हर ली हर बाधा।।
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दुख झेलकर सीता ने पति प्रेम की रीत निभाई।
जंग लड़कर सावित्री ने ,यम लोक में हाहाकार मचाई।।
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प्रेमवश प्रेयसी बनी, मीरा लाज गंवाई।
एकलव्य की अनन्य गुरु प्रेम ने,द्रोण की शीश नवाई।।
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रावण का ये कैसा प्रेम,जान पर भारी बहन की आन।
भक्त के प्रेम में हार गए  भगवन,चाहे प्रह्लाद हो या हनुमान।।
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देश प्रेम की अगन लगी,प्राण गवा दी जुनून में।
भगत आजाद का कैसा प्रेम,रंग दी धरती खून में।।

         
        अजय पटनायक

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