Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- प्रेम

नाम___गिरधारी लाल चौहान
जिला_जांजगीर_चाम्पा
राज्य__छत्तीसगढ़
विधा---कविता 
शीर्षक---तेरे बिन प्रेम की
व्याख्या____प्रस्तुत कविता में एक प्रेमी द्वारा अपने प्रेमीका के  विरह  में उत्पन्न वेदना एवं उससे  मन पर पड़े प्रभाव एवं उनसेमिलने की उत्कंठा का  वर्णन किया गया है ।
************************************************
 तेरे बिन प्रेम की

तेरे बिन प्रेम की, बदली न बरसात ।
 तेरी यादों में जल रहे ,हम दिन रात ।

जबसे हुआ नैनों से ओझल ।
 तबसे नैन निहारे नहीं ।
एक तेरे है विचार मन में ।
और कोई दूसरा विचारे नहीं ।
तेरे प्रेम की दिल में,हर पल हो रहे वज्र पात ।

तेरे प्रेम शब्द इन कानों में।
अब भी गूंज रहे ।
क्या उत्तर दूं तेरे बारे में ।
मुझसे ये पूछ रहे ।
कब तक रहेंगे रात विरह,कब होगी मिलन प्रभात ।

प्रेम तपस्या है या  पूजा।
कोई उत्तर देता नहीं ।
हम पाकर ही दम लेंगे ।
इससे कोई समझौता नहीं ।
तुमसे न हो सके न सही , हमसे होगी शुरुआत ।

प्रेम पथ के हम राही ।
चलना ठान लिये है ।
तू ही  है वह कारण ।
जिसके लिये कई अरमान लिए है ।
चलेंगे इस राह में, जरुर बदलेगा हालात ।

जब तेरे स्वप्न टूट जायेंगे ।
तब मेरे स्वप्न मिल जायेंगे 
अब आना मेरा शुरु हुआ ।
देखना सब बदल जायेंगे ।
नहीं चलता इसमें सोचा समझा,सब चलते अकस्मात ।

8 comments:

  1. सर आपने उक्त कविता में दो प्रेमियों के वियोग के पश्चात होने वाले दुःख का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है....बहुत सुंदर रचना ������...

    ReplyDelete
  2. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  3. बहुत ही अच्छी कविता है सर

    ReplyDelete
  4. Mast Rachna hai sir

    ReplyDelete
  5. Bahut hi sundar rachna very nice song☺️👌👌

    ReplyDelete
  6. Bahut hi sundar rachna very nice song☺️👌👌

    ReplyDelete
  7. Bahut hi jayad sudhar Kavita hai sir aur beautiful poetry hai

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...