जिला_जांजगीर_चाम्पा
राज्य__छत्तीसगढ़
विधा---कविता
शीर्षक---तेरे बिन प्रेम की
व्याख्या____प्रस्तुत कविता में एक प्रेमी द्वारा अपने प्रेमीका के विरह में उत्पन्न वेदना एवं उससे मन पर पड़े प्रभाव एवं उनसेमिलने की उत्कंठा का वर्णन किया गया है ।
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तेरे बिन प्रेम की
तेरे बिन प्रेम की, बदली न बरसात ।
तेरी यादों में जल रहे ,हम दिन रात ।
जबसे हुआ नैनों से ओझल ।
तबसे नैन निहारे नहीं ।
एक तेरे है विचार मन में ।
और कोई दूसरा विचारे नहीं ।
तेरे प्रेम की दिल में,हर पल हो रहे वज्र पात ।
तेरे प्रेम शब्द इन कानों में।
अब भी गूंज रहे ।
क्या उत्तर दूं तेरे बारे में ।
मुझसे ये पूछ रहे ।
कब तक रहेंगे रात विरह,कब होगी मिलन प्रभात ।
प्रेम तपस्या है या पूजा।
कोई उत्तर देता नहीं ।
हम पाकर ही दम लेंगे ।
इससे कोई समझौता नहीं ।
तुमसे न हो सके न सही , हमसे होगी शुरुआत ।
प्रेम पथ के हम राही ।
चलना ठान लिये है ।
तू ही है वह कारण ।
जिसके लिये कई अरमान लिए है ।
चलेंगे इस राह में, जरुर बदलेगा हालात ।
जब तेरे स्वप्न टूट जायेंगे ।
तब मेरे स्वप्न मिल जायेंगे
अब आना मेरा शुरु हुआ ।
देखना सब बदल जायेंगे ।
नहीं चलता इसमें सोचा समझा,सब चलते अकस्मात ।
सर आपने उक्त कविता में दो प्रेमियों के वियोग के पश्चात होने वाले दुःख का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है....बहुत सुंदर रचना ������...
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ReplyDeleteबहुत ही अच्छी कविता है सर
ReplyDeleteMast Rachna hai sir
ReplyDeleteBahut hi sundar rachna very nice song☺️👌👌
ReplyDeleteBahut hi sundar rachna very nice song☺️👌👌
ReplyDeleteBeautiful poitry.. awesome
ReplyDeleteBahut hi jayad sudhar Kavita hai sir aur beautiful poetry hai
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