स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंद मुक्त रचना
शीर्षक -"एक आह्वान हिंदुस्तानियों के नाम"
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मेरा आह्वान है सभी हिंदुस्तानियों से
आप दूर रहो प्रत्येक चीनी सामानों से
भूलो ना तुम 1962 का भयंकर युद्ध
जिससे अक्साई भारत से गया था छूट
गलवाना के 20 शहीदों ने बता दिया
हमें ज़मी जान से प्यारी है जता दिया
अब बारी हमारी है हम भी दिखाएंगे
चीनी हर चीज खाक में मिलाएंगे
फिर 1962 का दौर नहीं दोहराएंगे
हम मैक मोहन को भी लांघ जाएंगे
याद है गलवाना के शहीदों की कुर्बानी
कतरे कतरे का हिसाब लेकर आएंगे
मेरे कलम बयां करते हुए आज रोते हैं
मगर भारत के कुछ लोग बेसूध सोते हैं
पुष्पा के कलम ने कसम खाई है आज
पहना के रहेगी भारत को विजय का ताज
चीन है जो दुश्मनी निभाए जा रहा है
हम हैं जो उसके उत्पाद पर जिए जा रहे हैं
चीनी वस्तुओं को कभी ना हाथ लगाएंगे
आओ साथियों एकता के स्वर गुनगुनायेंगे
आधी जंग हम ऐसे ही जीत जाएंगे
बिना बंदूक चीन को खूब मजा चखाएंगे
बहुत सुन्दर। जय हिंद।।
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना 👌👌
ReplyDeleteबहुत बढ़िया रचना.... अनुकरणीय । जय हिंद ।।
ReplyDeleteबहुत खूब अच्छा रचना सुन्दर लगा
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteगजब
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