Thursday, June 18, 2020

मुंगेली से नागेश कश्यप की रचना- नारी

रचनाकार का नाम:- नागेश कश्यप
जिले का नाम:- मुंगेली(छत्तीसगढ़) 
शीर्षक:- नारी
विधा:- कविता

              नारी

नारी तोर महिमा लिखत ले,
मोर कलम घलो थरथरावत हे।
शक्ति स्वरुपा देख के तोर,
स्याही घलो घबरावत हे।।

घर के बुता चुल्हा चँऊका,
करनी धरनी सब तोरे हाथ।
सकल पदारथ घर के संसो,
लहुट के आथे तोरे माथ।
चारो मुड़ा ले जिनगी तोला,
अँगरा बरोबर भभकावत हे।
नारी तोर.......थरथरावत हे।।

घर के बोझा उठाथच तँय,
बखत परे म सियान बनके।
बैरी पेट के पुर्ति  करथच,
बनिहारी भुती खंती खनके।
बिपत परे म तोर चंडी रुप,
रण तलवार लहरावत हे।
नारी तोर.......थरथरावत हे।।

एक नही कई रुप हे तोर,
कतका के महिमा गिनवाँव।
एकठन रुप महतारी तोर,
जेखर मया भरे मैं बात बताँव।
हर घर बहिनी रुप ह तोर,
राखी भाई ल पहिरावत हे।
नारी तोर.......थरथरावत हे।।

सिरजन करथच खेती खार के,
अन्न धन घलो उपजाथच तँय।
बन बनिहारिन महल बनाथच,
फेर कुटिया जिनगी पहाथच तँय।
कतको बड़का बुता तोर आघु,
नानकन तोला जनावत हे।
नारी तोर.......थरथरावत हे।।

                   नागेश कश्यप
            कुँवागाँव, मुंगेली छ.ग.।।
              

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...