*निवास -रायपुर, छत्तीसगढ़
*जिला-रायपुर ।
*शीर्षक--"अमनो--शाँति "
*विधा--कविता (छ्न्द-मुक्त)
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===="अमनो--शान्ति "====
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क्यों हो रहा, मानवता का,
विश्व में,चारों ओर हनन ।
आंतकवाद,नस्लवाद,नक्सलवाद
और कालाबाजारी,भ्रष्टाचार से,
सब चाहते हैं----
हो देश-विदेश में--अमनो -शान्ति ।1।
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हम-इन्सानों में,जब-जब भूख--
विलासिता की बढ़ी है,
इन्सान ने,किया है,इंसानियत का खून।2।
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नित -वैज्ञानिक सोच ने,
प्रगति--खोजों चाह में,
पर्यावरण से किया है, खिलवाड़--
उतने ही,जिम्मेदार हम--सभी,
आओ राष्ट्र--शान्ति से,विश्व में--
अमनो--शांति का,सन्देश फैलायें।3।
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धर्म-जाति,श्वेत-अश्वेत संघर्ष--
उंच-नीच,छुत-अछूत व अल्पसंख्यकों से करते आ रहे हैं,भेद---
विश्व-मानवतावाद के हैं,ये सब कलंक,
आओ हम,इसे जड़ से मिटायें---
और विश्व-शांति का,इंसानी-पैगाम,
यूँही चारों ओर फैलायें ।4।
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हे! नौजवानों----
तुम सृजनकर्ता हो--
पूरे विश्व ,समाज व इस पावन धरा के,
बेहद आशायें हैं---
हमें तुम्हीं से--।
बनाओ तुम,इस धरा को,अब स्वर्ग
या मिला दो इसको गर्त में--।
क्यों हो रहा,मानवता का--
विश्व में,चारों ओर हनन--
आंतकवाद,नस्लवाद,नक्सलवाद
और कालाबाजारी व भ्रष्टाचार से,
सभी चाहते हैं---दिल से--
हो--देश-विदेश में,अमनो-शांति ।5।
======इति==========
व्याख्या:---इस रचना के माध्यम से
रचनाकार यह बताने की कोशिश की है कि विश्व-शांति के लिए मानववादी दृष्टिकोण को सभी लोगों को अपनाने का आह्वान किया है ।ताकि मानव अधिकार का हकदार हर मानव जाति को सहजता से मिलते रहे ।
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मौलिक प्रस्तुति:-अरमो,रायपुर छ.ग-।
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