Friday, June 19, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- विश्व शांति

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--दोहा छन्द  
शीर्षक--'विश्व शान्ति'


प्रेम - पीयूष  भरा  मन , हो  श्रद्धामय   कान्ति ।
समस्त  सृष्टि के भीतर , व्याप्त हो विश्व शान्ति ।।१।।
शान्ति-सद्भाव नित रहे , लोगों  के   मन  वास ।
अमन-चैन  बढ़ाने  का , प्रतिपल  करें   प्रयास ।।२।।
सहयोग-त्याग-तपस्या , मन  में   हो  सुविचार ।
मानव   जन्म  पाये  हैं , करना  नित   उपकार ।।३।।
मिट  जाए अराजकता , लूट - खसोट   तमाम ।
दंगा-फसाद-छल  मिटे , अनाचार    का   नाम ।।४।।
स्नेह-सौहार्द्र  नित बढ़े , बन्धुत्व   भाव    खूब ।
संवेदना     सागर    में , दुनिया    जाए     डूब ।।५।।
नक्सल  - आतंकवादी , मिलकर  करें  विचार ।
देश हित  में  आगे  रह , करें     विश्व     शृंगार ।।६।।
काल  को  गँवायें नहीं , सिरपर    बैठा   काल ।
न जाने  कब  ले जाए , पकड़   हमारा    बाल ।।७।।
माया  हम  जोडें  नहीं , करके    छल   भरपूर ।
मायाधीश   की  माया , करे    गर्व    को   चूर ।।८।।
सो नर  निश्चय  पीर है , जो  समझे   पर - पीर ।
संवेदनामय   दिल   है , हुआ    करता   अधीर ।।९।।
जीने दो जियो तुम भी , छा    जायेगी   शान्ति ।
निश्चय  सारे  विश्व  से , मिट   जायेगी   क्रान्ति ।।१०।।
जग में  सब कोई रखें , जीने   का   अधिकार ।
छीन   लेना  है इसको , रहा    अधर्म    अपार ।।११।।
समभाव'ठाकुर'मन में , करेगा   यदि   निवास ।
तब  सारे  विश्व का  है , हो   सकेगा   विकास ।।१२।।
                 ०×××××××०
व्यख्या--विश्व में शान्ति स्थापना के उपाय का वर्णन।
            काल=समय,मौत।पीर=सन्त,पीड़ा।माया=
             धन,ईश्वरीय शक्ति=यमक अलंकार ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...