Wednesday, June 24, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- गरीबी

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)
शीर्षक :-  गरीबी
विषय :- पुनरूक्ति अलंकार लिए गरीबी का चित्रण

     ~ •°•● *गरीबी* ●•°• ~
गरीबी कभी-कभी 
मजबूर कर देती है,
सारे सपने काँच सा  
चूर-चूर कर देती है।

कभी तन में ना धोती
पेट बिन रोटी कर देती है।
अन्न के दानों से
 बहुत दूर के देती है।

बच्चे भी हालात की 
हालात  समझते  है,
खिलौनों के लिए बार-बार
 जी नहीं करते।

महलों के चोंचले लिए 
अमीरी सड़कों पर फिरते,
ये बेचारे ही फैलाएं 
गन्दगी समेटते है।

कभी फांके भी हो 
हँसते-हँसते सो जाते है,
गरीबी का रोना रोते नही 
हरदम मुस्कुराते है।

व्याख्या :- प्रस्तुत कविता में गरीब लोगों की व्यथा बताई गई है,साथ ही साथ अभावों में भी वो कैसे मुस्कुराते है उसका वर्णन करते है।


     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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