स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता ,पुनरुक्ति अलंकार लिए
शीर्षक -"गरीब"
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हाय- हाय ये गरीबी
भुखमरी और बेबसी
पेट में अन्न का दाना नहीं
भटकते जैसे हबीबी
रोज- रोज खुद खपते
अमीरों को है बनाते
और देखो अमीरों को
गरीबों को खूब सताते
मर -मर के काम करते
फिर भी दाम सही ना मिलते
ज्यादा की इच्छा ना कर
थोड़े में ही गुजारा करते
हाल -हाल की बात है
एयरपोर्ट से करोना आया
राशन कार्ड का बोझ बढ़ाकर
गरीबों पर कहर बरपाया
मिलों चल -चल मजदूर आए
ना बसें थी ना ट्रेन का किराए
पल -पल घर को याद करें
और चल चल थकान न सताए
व्याख्या- गरीबों की कथा और करोना महामारी में उनकी हुई दुर्दशा का वर्णन है।
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