Wednesday, June 24, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- दुःखी दरिद्र

रचनाकार -उर्मिला सिदार
 जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा कविता
  शीर्षक- "दुःखी दरिद्र" 
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          दुःखी दरिद्र
 साधन विहीन दुखी दरिद्र ,
 जीता है वह कुंठित होकर,    अज्ञानता और शोषण से,
जीता है वह दब -दब कर।

 शोषित मानव शोषण कर,
 देता दुःख शोषित कर ,
कामना दबा ,मन मार कर ,
जिंदगी जीता कुंठित होकर।

 निर्दयी मानव गरीबी क्या ?जाने, शोषण कर लगा है ,धन कमाने, संवेदनहीन साधन संपन्न, मानसिकता से जीता दुःखी दरिद्र।
 व्याख्या- इस कविता में कवित्री साधन विहिन दुःखी दरिद्र और साधन संपन्न दुखी दरिद्र दोनों की दशा का वर्णन किया है ।एक साधन की गरीबी ।दूसरा मानसिकता के गरीबी ।एक दबने वाला गरीब और एक दबाने वाला गरीब।

 उर्मिला सिदार 
बुलाकी रायगढ़

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