जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---लेख
शीर्षक--- खुशी का खजाना
व्याख्या--लेखक के द्वारा एक परिवार का वर्णन किया गया है जिसमें लड़के की नौकरी भारतीय सेना में लगने का वर्णन किया गया है ।
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खुशी का खजाना
बेटा ये तुम्हारा रजिस्ट्री पत्र डाकिया देकर गया है पिता ने देते हुए कहा ।
कहां से आया है पिता जी,पुत्र ने लेते हुए कहा ।
भारतीय सेना गढ़वाल
पिता ने कहा -पूछ रहा था मोहन कहां है कहकर मैंने उसे कहा अपने दोस्त के यहां गया है अभी दस मिनट पहले ही तो गया है उसके दोस्त की बहन की शादी है आज बारात आया हुआ है ,सुबह आऊंगा कहकर गया है ।
और क्या कह रहा था पुत्र ने पूछ्ते हुए कहा ।
हंसते हुए कह रहा था उससे पार्टी लेना था ।
मैं उसको बोला हूं मेरे से ले लो ।वो बोल रहा था आप से नहीं उसी से लेना है ।
और फिर कह रहा था आज नहीं तो कल सही ।
रजिस्ट्री पत्र को मोहन खोलता है पढ़ता है और पिताजी से कहता है पिताजी ये नौकरी का पत्र है गढ़वाल रेजीमेंट में सैनिक के रूप में मेरी नियुक्ति हुआ है । आज चौदह तारीख है सत्रह तारीख को वहां आवश्यक दस्तावेज के साथ शाम पांच बजे तक उपस्थित होना है ।
अपने पिता जी के चरणों में अपना शीश झुका देता है ।
पिता जी हंसते हुए आशिर्वाद देते हैं ,कल्याण हो तुम्हारा बेटा पहिली बार में ही तुम्हारा चयन हो गया । बड़ी खुशी की बात मैं स्वयं सेना में भर्ती होने के लिए कई बार प्रयास किया सफलता नहीं मिली थी तूने मेरे सपने को साकार कर दिया ।
तुम्हारी मां को मैं नहीं बताया हूं ।
जिस समय डाकिया पत्र लेकर आया तुम्हारी मां रसोई में थी चाय बना रही थी उसी समय देकर तुरंत चला गया । मैं आलमीरा में रख दिया था।
उसी समय पड़ोस की तुम्हारी सोहनीचाची अपने घर की शिकायत लेकर आ गयी उसी में उलझ गए ।कल शाम को ही अपने मायके चली जाऊंगी कहकर रो रही थी ।
मुश्किल से मानी और घर गयी ।बहू स्वयं उसको घर तक पहुंचाने गयी थी ।पूरे घर भरके लोगों को समझा कर आई है ।
शादी कैसे रहा कितने बाराती आए थे खाना पीना व्यवस्था ठीक था न ।
कोई झगड़ा झंझट -
नहीं पिताजी -
शादी बढ़िया से निपटा ,खाने की तारीफ कर रहे थे, कोई झगड़ा झंझट नहीं । आपके एक पुराने दोस्त भी आये थे पूछ रहे थेकह रहे थे हम दोनों की एक साथ नौकरी लगी थी । मैं सेवा निवृत्त हो गया हूं तुम्हारे पिताजी का चल ही रहा है । मैं घर आने के लिए निवेदन किया लेकिन समय नहीं है कहकर टाल दिए । फिर कभी समय मिलेगा तो जरुर आऊंगा कह रहे थे ।
तेरा मम्मी कहां है उसे बता दें ।
बहू वही पर खड़ी पिता पुत्र की बात सुन रही थी।
दोनों की बात सुनकर बहू स्वयं अपने सासू मां को बुलाने के लिए दूसरे कमरे में चली गई ।
दोनों एक साथ आते हैं,।
अरे कल जल्द बाजी और भुलने की आदत की वजह से
कल तुम दोनों को एक शुभ समाचार नहीं सुना पाया था ।
तुम्हारे बेटे का नौकरी लगा है भारतीय सेना में सैनिक के पद पर परसों ज्वाइन करना है ।
मां कहती हैं मेरा बेटा है आपका नहीं है ।
मैं ऐसा थोड़ी कह रहा हूं जी ।
तुम्हारा याने हमारा ।
बात बनाना तो कोई आपसे सीखे । उसके पिता जी कोई जवाब नहीं देते हैं ।और मोहन से कहते हैं
हां मोहन आज रिजर्वेशन करवा लेना जो ढाई बजे रात को ट्रेन जाती है उससे चले जाना । लगभग दो बजे तुम्हें स्टेशन छोड़ देगी । वहां से आटो कर लेना पन्द्रह मिनिट में कार्यालय पहुंच जाओगे ।
और सुनो अपने जीजा को यह खबर तुरंत दे दो अपने मामा जी को भी बता देना । और अपने मौसा जी को भी बता देना ।
अगर उनके पास समय रहेगा तो आने के लिए कहना ।
ये खबर मोहल्ले में फैल गई पूरे मोहल्ले भरके लोग घर में इकट्ठे हो गए ।
कोई मोहन को बधाई दे रहा था, बड़ा भाग्यशाली है भाई देश की सेवा करने का मौका मिला है । अच्छी तरह से सेवा करना अपने गांव का नाम रोशन करना ।
कोई उसके पिता जी को बधाई दे रहे थे और कह रहे थे तुम्हारा बेटा बहुत ही काबिल और होनहार है।अच्छा हुआ भैया हमारे गांव में कोई इस विभाग में नौकरी नहीं कर रहा था अब सभी विभाग के लोग मिल जाएंगे ।
कोई मां को बधाई दे रहे थे कह रहे थे तुम्हारा बेटा अब देश का बेटा बन गया भारत माता की बेटा कहलायेगा ।
कोई बहू को बधाई दे रहा था तुम्हारे कारण ये सब हुआ है, पिछले महीने लक्ष्मी का आगमन और इस माह में नौकरी ।
मोहन के पिताजी जी सबको संबोधित करते हुए कहते हैं कि ये सब आप सबके आशिर्वाद का परिणाम है,
इतने में मोहन पास के होटल से मिठाई लेकर आता है और सबसे कहता है बिना मिठाई खाये किसी को नहीं जाना हैं आप सब बैठिए ।
कुछ समय पश्चात मोहन सबको मिठाई बांट रहा था । सबके मन में खुशियां भरा था ।
भारत माता की जय कहकर सब जाने लगे ।
Superb
ReplyDeleteMay be 2nd part..???
ReplyDelete😊👌
ReplyDelete💐👌👌👌
ReplyDeleteDil khush ho gaya mera 🤩♥️😇🙏👌
ReplyDeleteMaza aa gaya ♥️😇
ReplyDeleteSir aap bahoot achha kaam kr rahe ho ....aap aese hi or kavita lekte rahiye ♥️
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