रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-रायपुर छत्तीसगढ़ ।
जिला-रायपुर ।
शीर्षक-"नशाखोरी "
विधा-कविता (छ्न्द-मुक्त)
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*****""नशाखोरी ""*******
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क्यों,तुम इतना पीये जा रहे हो ,
अपने गमों को भुलाने का,क्यों तुम--
बहाना ढूढ़े जा रहे हो ।01।
वह तो,तुझे,मौत की ओर ले जा रही है
पर,आज तुम,क्यों इतना पीये जा रहे हो,
क्यों,तुम्हें किस बात का,इतना गम है,
जहाँ में,औरों के गम क्या कम हैं ।02।
गम भुलाने के,कई रास्ते हैं,मेरे भाई,
समाज,दीन-हीन व अपाहिजों की कर सेवा ,
और अपने परिवार-समृध्दि की सेवा,
इससे मिलेगा तुझे,ईश-भक्ति का प्रताप,
साथ ही,होगा तेरे तन-मन का उध्दार।03।
जिसे पीता है,मौज उड़ाने के लिए,
वह पीता,तेरे घर-सँसार को डूबाने के लिए,
तू जान बुझकर,
क्यों मौत को गले लगा रहा है ।04।
अभी भी,तू सम्हल जा,अब भी वक्त है
वरना बाद में,हाथ मलेगा व पछतायेगा
आज दोस्तों ने,दोस्ती के नाम से पिलाएगा,
कल तुझे भी,दोस्तों को पिलाना होगा।05।
फिर धीरे- धीरे तू कंगाल हो जायेगा,
न दोस्त रहेंगे और न उनका प्यार रहेगा,
न तेरा तन साथ देगा और न तेरा मन,
बस तन्हाईयों में,अकेला तड़पता रह जाएगा ।06।
भूल से भी ,कोई दोस्त साथ देने आएगा,
इस मर्ज का इलाज,तू करता जायेगा,
फिर तेरा जीवन,सँवर जायेगा ।07।
और खुशियां आएंगी,तेरे जीवन में,
महक उठेगी तेरी बगिया,
सारे गम के बादल छट जायेगें,
फिर से,इस समाज में,
तू खुद्दारी से जी पाओगे ।07।
========इति ==========
व्याख्या--रचना के माध्यम से रचनाकार यह कहना चाहता है कि मानव जाति के जीवन में मादक पदार्थों का नशा समाज के लोगों की संगत से ऐसे मिल जाता है जिसे कुछ लोग समझदारी दिखा छोड़ देतें हैं ।उनकी जिन्दगी सँवर जाती है और समाज में पहले जैसा सम्मान मिलने लगता है ।मूल बात यह है कि नशा सामाजिक बुराई है और इसका हमें मिलकर प्रतिकार करना चाहिए ।
-------मौलिक-प्रस्तुति:--
एच-एस-अरमो,रायपुर छत्तीसगढ़
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