Wednesday, June 3, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न" की वीभत्स रस में रचना

रचनाकार:- गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
जिला:- रायगढ़ ,छत्तीसगढ़
विषय:- वीभत्स रस
शिर्षक:- "मदिरा संग चखना"
विधा:- छंद मुक्त

            मदिरा संग चखना
**************************
अद्धी-देसी-चेपटी चाहे उधारी में तुम रखना,
जेब खाली पर जरूर दिखेगा मदिरा संग चखना ।
राह में मौत से लड़ने को तैयार मिलते हैं,
कभी मिलो तो इनकी साहस जरूर परखना ।।

पत्नी बच्चों से लड़ कर वह निकलता है,
एक शहंशाह रातों का जुगनू सा‌ चलता है ।
सही सलामत सकुशल तो दिखता है,
पर भोर में गटर की नाली से महका मिलता है ।।

पुलिस के सामने भी कैसा अदब अड़ा रहा,
दो डंडे ऊपर,दो डंडे नीचे प्रसाद पाकर पड़ा रहा ।
लंगड़ी भूरी कुतिया चखने लगा मुंह चांट गई,
आनंद लेता दूर कोई पैक पर पैक चढ़ा‌‌ रहा ।।

भिन-भिन करते मक्खी भिनभिना रहे,
छोटे-छोटे कीड़े देखो कैसे तिलमिला रहे ।
खुद में ही मदहोश उसे होश कहां,
शायद स्वर्ग में अप्सराओं की याद दिला रहे ।।

भरी जेब से,सीना ताने शेर कोई चला था,
चांदनी रात में गली के कुत्तों संग सोया अकेला था ।
सफेद कपड़े में यह पीले-पीले दाग अच्छे हैं,
पर गली के बच्चों का अपशिष्ट भी अक्सर पीला था ।।

बच्चे बूढ़े सब लोग देखो हो दूर रहे,
विधायक सा हस्ती तुम्हारी मशहूर रहे ।
सौभाग्यवती पत्नी कपड़े कैसे साफ करे,
बादशाह तो दिन-रात नशे में चूर रहे ।।

पीने वालों को पीने का अपना मजा है,
मयखाने में कोई मामा साला तो कोई जीजा है ।
कुमार सानू और किशोर कुमार यहां खूब हैं,
बस बेवड़ों के बीच शरीफ को सुनने की सजा है ।।

धन्य धन्य है मदिरा धन्य है मदिरापान,
सहज स्वभाव से लाए तिरस्कार संग अपमान ।
मां बेटी सब लज्जित हो रहे,
घर गिरवी होकर गिरवी है सम्मान  ।।

            मौलिक रचना
        गुलशन खम्हारी"प्रद्युम्न"

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...