जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-घमंड किस बात का
विधा-मुक्त छंद
हाड़ मांस का काया मनवा
मिट्टी में मिल जायेगा,
घमंड किस बात पर करता
एक दिन बहुत पछताऐगा।
धन अपव्यय कर जश्न मनाया
जाने कितने मित्र बनाया,
पड़ी मुसीबत मुंह मोड़े सब
कोई तेरे घर न आयेगा।
मतलब की ये दुनिया प्यारे
सगे संबंधी और सखा ये,
माल, खजाना छोड़ के प्यारे
खाली हाथ तू जायेगा।
मत कर गरब गुमान प्यारे,
हाथ मल पछतायेगा,
मिट्टी की काया एक दिन
मिट्टी में मिल जायेगा।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
बहुत सुंदर रचना कवयित्री जी..इस मिट्टी रूपी काया (शरीर) पर हमे घमंड नहीं करना चाहिए...🙏
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