Wednesday, June 3, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- अहंकार

रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला      --  राजनांदगाँव (छ.ग.)
शीर्षक     --  अहंकार
विधा       --  दोहा 
रस         --   वीभत्स रस

**************************
।।1।।
बात अहम ये जान लो , करो नहीं 
अभिमान ।
मूल  यही  है नाश का , रखो सदा 
ये ध्यान ।।

**************************
।।2।।
नश्वर काय है मानवा , बात  राज 
की जान ।
तेरा  मेरा  कुछ  भी नहीं , करता 
किसका मान ।।

**************************
।।3।।
नित्य जले जो राख हो ,  रवि  बन
कर उजियार ।
हंस  फंसे  है जाल में ,  राह  चले 
व्यभिचार   ।।

**************************
।।4।।
विटप कटे अति ताप है , बढे़ जीव
संताप ।
बढ़ती निशदिन आपदा , बढे़  धरा
पर पाप ।।

**************************
।।5।।
दर्प  बडा़  वरदान का  , राजा  था 
लंकेश ।
अहं नाश नृप था  हुआ , अंत कहे
रघु ईश ।। 

**************************
।।6।।
पाप बढा़ था कंस का , विष्णु लेत
अवतार ।
ग्रास बना है काल का , कृष्ण करे 
उद्धार ।।

**************************
                रचनाकार 
          प्रवीण कुमार ठाकुर

**************************
व्याख्या :---
प्रस्तुत दोहा में हमने प्रदत्त  विषय 
को लक्ष्य करते हुए आज के  दिन
की सृजन विषय  अहंकार  लिखा 
है।  जिसमें  यह बताने का प्रयास
किया गया है कि दर्प सर्वदा विना
-श का कारण बनता है ।
हमे किसी भी प्रकार से घमंड नहीं
करना चाहिए ।क्योंकि दुनियां  में
हर चीज नाशवान है ,केवल हमारे
सद कर्म ही हमारे , हमें जिंदा रख
सकतें हैं ।  हमें  सदा  जन हीत में 
परोपकार करते रहना चाहिए ।
 यही इस सजन का अभिप्राय है ।
**********///////////********
*********////////////*********

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...