जिला -रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -अहंकार
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अहंकार
अज्ञानता से अहंकार,
अहंकार से क्रोध,
क्रोध से अक्षमता ,
अक्षमता से दोष।
दोष ही समस्या ,
समस्या ही दुःख ,
दुःख ही नर्क ,
नर्क ही दुःख ।
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व्याख्या- रचनाकार कहती है कि अज्ञानता से ही अहंकार की उत्पत्ति होती है। अहंकार ही क्रोध की जननी होती है क्रोध से अक्षमता से दोष होता है ।यही दोष समस्या का कारण बनता है। समस्या से ही दुख होता है और दुख में जीना ही नरक है और नर्क ही दुख का कारण है अतः मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए अर्थात अज्ञानता में नहीं जीना चाहिए अतः सभी मानव के लिए ज्ञान का होना आवश्यक है अर्थात जागृति में जीना आवश्यक है।
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