जिला-कांकेर, छग
शीर्षक- *वसुधैव कुटुंबकम्*
विधा-मुक्त छंद( यमक अलंकार)
शस्य श्यामल मेरी धरती
विभिन्न धर्मों की एकता
मेरे देश की है विशेषता
विश्व गुरु भारत आज
महामारी के चपेट में।
काल-काल के गाल में,
धरती मां के भाल में।
चिंता चिता न बन पाए,
आओ एकांत अपनाएं,
करोना से हम लड़ जायें।
जगत -जगत से जुड़ा रहे,
प्रकृति की रक्षा करें सब
वसुधैव कुटुंबकम् मंत्र हो,
मानवता भरा गणतंत्र हो,
सुरक्षित हर जनतंत्र हो।
आओ विश्व व्यापी वेदना को ,
हम समझे औरों को समझायें।
मरुभूमि में हरीतिमा भर दे,
विश्व शांति का दीप जलायें,
सब भाईचारे अलख जगाये।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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*यमक अलंकार*-
काल-काल-समय,मौत
जगत-जगत-एक नाम,संसार
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