Friday, June 19, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- वसुधैव कुटुंबकम्

कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर, छग
शीर्षक- *वसुधैव कुटुंबकम्*
विधा-मुक्त छंद( यमक अलंकार)

शस्य श्यामल मेरी धरती
 विभिन्न धर्मों की एकता
  मेरे देश की है विशेषता
   विश्व गुरु भारत आज
    महामारी के चपेट में।

काल-काल के गाल में,
  धरती मां के भाल में।
   चिंता चिता न बन पाए,
    आओ एकांत अपनाएं,
    करोना से  हम लड़ जायें।

जगत -जगत से जुड़ा रहे,
    प्रकृति की रक्षा करें सब
     वसुधैव कुटुंबकम् मंत्र हो,
      मानवता भरा   गणतंत्र हो,
        सुरक्षित  हर जनतंत्र हो।

आओ विश्व व्यापी वेदना को ,
  हम समझे औरों को समझायें।
   मरुभूमि में हरीतिमा भर दे,
    विश्व शांति का दीप जलायें,
     सब भाईचारे अलख जगाये।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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*यमक अलंकार*-
काल-काल-समय,मौत
जगत-जगत-एक नाम,संसार

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