जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक--- विश्व शांति और जन
व्याख्या--कवि के द्वारा विश्व शांति पर लोगों जैसे एकता, विजय,विकास,अमन, विश्वास के द्वारा किये प्रयासों का वर्णन किया गया है ।
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विश्व शांति और जन
विश्व शांति एकता के लिए ।
नि:शस्त्रीकरण का प्रयास करें ।
एकता ने इस पर बल दिया है ।
हम भी वही राह चलें ।
विजय ने इस विजय के लिए ।
जो उल्लास भरा मन में ।
हम भी चलो भरते जाएं ।
जिससे युद्ध न हो त्रिभुवन में ।
विकास ने लिया है ।
विश्व में शांति का प्रण ।
दिख रहा विकास उसका ।
अभी तो शेष है जीवन ।
अमन ने अमन के लिए ।
प्राण की बाजी लगा दी ।
विश्वास ने जो विश्वास दिलाया ।
ओ आज करके दिखा दी ।
शांति एकता भाईचारा ।
आओ मार्ग पर चलें ।
न हो युद्ध किसी भी हाल में ।
जरुरी है इससे सब टलें ।
शांति सबका द्योतक ।
हो सबका ही नारा ।
न हम लड़े न कोई लड़े।
हो युद्ध जहां से किनारा ।
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