स्थान- डोलेसरा ,तमनार
जिला- रायगढ़ ,छत्तीसगढ़
विषय- भगवान जगन्नाथ
शीर्षक- चली रथगाडी
चली रथगाडी
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चली चली रे रथगाड़ी ,लेके भगवान को चली।
घर मौसी के निकलके,भव धाम को चली।।
खुशियाँ लुटाते चली,सबको नचाते चली।
घूम घूमकर गाँव गली में,सबको रिझाते चली।।
बांटते चले भोग प्रसाद को,लेके आटे संग मिष्ठान्न को चली।
चली चली रे रथगाड़ी,लेके भगवान को चली.......
प्रीत के गीत सुनाते चली,लोक के रीत निभाते चली।
नव रत्नों से सजकर रथ में,जीवन को महकाते चली।।
डोरी से खिंचते प्रभु को,लेकर वस्त्र अन्नदान को चली।
चली चली रे रथगाडी,लेके भगवान को चली.......
रिस्तो की डोरी बुनते चली,अभिमानी को चुनते चली।
दशों दिशाओं में घूमते चले,सबके दुखों को सुनते चली।।
पाकर प्यार ननिहाल का ,देते सब बरदान को चली।
चली चली रे रथगाड़ी ,लेके भगवान को चली.......
ढोल नगाड़े बजाते चली,उमंगों के कलश छलकाते चली।
मौसम के बौछारों से,
धरती को लहराते चली।।
जग्गनाथ ,बलभद्र भैया जी,
संग लेके सहोदरा सारा जहान को चली।
चली चली रे रथगाडी ,लेके भगवान को चली......
मौलिक रचना
अजय पटनायक
Bahut Sundar rachana
ReplyDeleteशानदार
ReplyDeletevry vry nice jai jaggnath
ReplyDeleteVery nice ji
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