Tuesday, June 23, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- जगन्नाथ

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर
विषय :- जगन्नाथ
~~~~~~~~~~~~~

जगत के स्वामी,
  अन्तर्यामी तुम्हें प्रणाम,
    सबके पालनहार विष्णु के 
      अवतार प्रभु जपूँ नाम।

अद्भुत सुंदर रथ 
  नन्दी घोष कहलाता,
    ध्वज ऊँचा नीलांचल 
       पूर्व दिशा फहराता।

तेरी कृपा को 
  कैसे बयाँ करूँ,
    अनाथों के नाथ 
       जगन्नाथ नमन करूँ।

तुम्हारे दर्शन को
  दुनियाँ उमड़ गई,
    चरणों में आकर
      जिंदगी संवर गई।

आषाढ़ मास शुक्लपक्ष 
  द्वितीया तिथि आई,
    सारे भक्त जनों में 
      खुशियों की लहर छाई।

सारी जगती में 
  तेरा असर दिख रहा,
    बलभद्र,सुभद्रा, जगन्नाथ
       को नमन कर रहा।

महिमा तेरी अपरम्पार 
   नमन तुम्हें बार-बार,
    जग के नर-नारी खड़े
        विनय करते जयकार।

हे प्रभू मैं दिन दुखी
  मेरी सुनो आर्तनाद,
    बिना तुम्हारे कोई नहीं 
      सुनता मेरी आवाज।

दूर-दूर से आते 
  नर-नारी द्वार,
    जगत के स्वामी उबारो, 
       मैं खड़ी बीच मंझधार।

व्याख्या-प्रस्तुत कविता में भगवान जगन्नाथ की वंदना,उनके रथ का वर्णन,एवं भगवान की महिमा का वर्णन किया गया है।

~~~~~~~~~~~


     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...