जिला-कोरबा छत्तीसगढ़
उत्प्रेक्षा अलंकार
विधा - कविता
शीर्षक -मेरी अलि
प्रस्तुत है कविता-
मेरी अलि की नाक की मोती ,
ले गया तोता मानों बीज दाड़िम की ।
मेरी अलि की काली अल्कें,
मानों बादल काली घटा सी ।
मेरे भृकुटी मध्य गुफा में दिव्य ज्योति समाया है ऐसे ,
मानों परम सिमट गया हो वहीँ पर
ब्याख्या- रचनाकार नें किस तरह तोता ने सखी की नाक की मोती को अनार के बीज का भ्रम समझ गया ये दर्शाया है कुछ इसी तरह बालों को काली घटा कहा है और भृकुटी के मध्य की दिव्य ज्योति अंश को परमात्मा का सिमट जाना बताया है ।
उत्तम सोच उत्तम रचना। और इसमें लिखने की कृपा कीजिये
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