जिला--जांजगीर-चाम्पा, छत्तीसगढ़
विधा-कविता
शीर्षक-बचपन फिर आए
व्याख्या- कवि के द्वारा अपनी बचपन की कल्पना की गई ।
बालपन की सहजता का वर्णन किया गया है ।
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बचपन फिर आए
मेरा बचपन फिर फिर आए ।
यादों के घर द्वार में ।
पाकर मन आनंदित मेरा ।
ज्यों सुखी संसार में ।
खेल कूद पहले मन सोचा ।
संग गलियों की ओर गया ।
मानों सज्जन साधू पा खुश ।
वैसा ही मन मेरा भया ।
खूब खेला धूल मिट्टी नहाया ।
जैसे भक्त गंग समाया ।
इस हाल में जब देखी अम्मा ।
नैनन उसकी नदी बहाया।
आस-पास चिंता न कुछ भी ।
सुख दुख का संग नहीं ।
शिव की तरह माने कैसे जीवन ।
न कृष्ण सम प्रेम रंग नहीं ।
बातें तुतली भारी मीठी ।
मानो मुंह गन्ना रस बरसे ।
ऐसा तन मन अब भी भाये ।
रहो सदा हरषे हरषे ।
खाना पीना सुध नहीं ।
खाया पीया ज्ञात कहां ।
धर्म ,भाषा ,जाति ,एकता।
नहीं मालूम रहते कहां ।
गिरधारी लाल चौहान
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