जिला- कोण्डागाँव
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- परदेशी पिया
काले बादल छा गये अब उठती है हूक जिया,
आ जाओ अब प्रतीक्षा का अंत हो परदेशी पिया।
बैरन आंँख दिखाती है चमक -चमक कर बिजुरी,
प्रियतम आन मिलो बरसे बदरा सही न जाये दूरी।
बारिश की रिमझिम संग गीत विरह के गाया न जाए,
पूछे हृदय व्याकुल बरसा संग क्यूँ न पिया आए ।
विरही हिया आकुल नैनन पिया की सुमधुर छवि ,
जाने क्या पीर और दिखाये सुन सखि प्यारी भवि ।
अब रोते -रोते असुवन सूखे दृगकोर भये रुखे ,
जाने कब पीर मिटे हिया की क्या परदेश जा नाते टूटे ।
उर में विश्वास सखि आयेंगे मेरे मनभावन भी,
देखना खिलखिलाता लायेंगे संग सावन भी।।
रश्मि विपिन अग्निहोत्री
केशकाल जिला कोण्डागाँव
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