Thursday, June 18, 2020

कोण्डागाँव से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- परदेशी पिया

नाम - रश्मि विपिन अग्निहोत्री
 जिला- कोण्डागाँव
 राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- परदेशी पिया

काले बादल छा गये अब उठती है हूक जिया, 
आ जाओ अब प्रतीक्षा का अंत हो परदेशी पिया। 

बैरन आंँख दिखाती है चमक -चमक कर बिजुरी,
प्रियतम आन मिलो बरसे बदरा सही न जाये दूरी। 

बारिश की रिमझिम संग गीत विरह के गाया न जाए, 
पूछे हृदय व्याकुल बरसा संग क्यूँ न पिया आए । 
 
विरही हिया आकुल नैनन पिया की सुमधुर छवि , 
जाने क्या पीर और दिखाये सुन सखि प्यारी भवि । 

अब रोते -रोते असुवन सूखे दृगकोर भये रुखे , 
जाने कब पीर मिटे हिया की क्या परदेश जा नाते टूटे । 
 
उर में विश्वास सखि आयेंगे मेरे मनभावन भी, 
देखना खिलखिलाता लायेंगे संग सावन भी।। 

       रश्मि विपिन अग्निहोत्री
    केशकाल जिला कोण्डागाँव

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