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*रचनाकार-एच-एस-अरमो"अरमान"
*निवास-रायपुर (छत्तीसगढ़)
*जिला--रायपुर ।
*शीर्षक--""वृक्ष की महिमा ""
*विधा--कविता (छ्न्द-मुक्त)
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****""वृक्ष की महिमा ""****
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हे!वृक्ष तुम हो कितने महान ,
समय आँधी से लड़ते,पलते बढ़ते ,
धरती से अमृत निकालकर ,
उचाईयों में आगे बढ़ते ।
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प्राण वायु,घनेरी छाया के तुम दाता,
फल व औषधीय के ,
तुम हो अनमोल प्रदाता ,
मैं,तुझे कैसे भूलूँ ,
तुम हो कई लाभों के गुणदाता ।
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--हे!वृक्ष तुम हो कितने महान्---
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बचपन से लेकर मृतशय्या तक,
तूने दिया है हम इंसानों का साथ ,
पर तुम ही नहीं रहोगे, तो--
कल और होगा जीवन,
तिल--तिल नश्वर,
तेरी कृति की,प्रकृति में,
है,ममता की छाँव ।
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--हे!,वृक्ष तुम हो कितने महान् ----
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हमें तन की जतन से ज्यादा ,
तेरी जतन करना है,
इसे भी,सुरक्षित रखना होगा ,
इससे पर्यावरण को भी,
संरक्षित रखना होगा ।
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हे! वृक्ष तुम हो कितने महान् -----
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दुनियाँ में,मिले जिसे ,सच्चा दोस्त,
बनती उसकी,सुखमय फुलवारी,
जीवन में,जो एक वट वृक्ष लगाये,
लंबी-आयु का,वो यशगान को पाये ।
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हे! वृक्ष तुम हो कितने महान् ----
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आओ साथियों,हम-सब मिलकर--
करें ये वन्दन ,
प्रकृति की हरियाली में,
लगा दे ,खुशबूदार चन्दन,
करता रहे,समाज तुम्हारा अभिनन्दन ।
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हे! वृक्ष तुम हो कितने महान् - - -
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स्वरचित प्रस्तुति-अरमो ,रायपुर ।
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**व्याख्या:--उपरोक्त रचना में वृक्ष की महिमा के बारे में आपके समक्ष प्रस्तुत किया है ।जिसमें पर्यावरण के संरक्षण में हमारा क्या योगदान हो सकता है ।
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