Friday, June 5, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- पर्यावरण दिवस

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रचनाकार  -- प्रवीण कुमार ठाकुर 
जिला       -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
शीर्षक     -- विश्व पर्यावरण दिवस 
विधा        -- चम्पू काव्य 
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वृक्ष धरा का  अनमोल  उपहार  ,
               नष्ट करे ना इसे काटकर बेकार  ।
फल देते  कई  होते  हैं छायादार ,  
               फल  से  करते  हैं  हम फलाहार ।
विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने
समुचे विश्व में पर्यावरण  सुरक्षा एवं  संरहण  के
के लिए 1972 में किया तथा  05 जून  1974
को लागू किया इसका  मूल उद्देश्य पर्यावरण के
प्रति सम्पूर्ण विश्व में राजनैतिक एवं  सामाजिक
रुप से  जन जागरुकता लाकर ना केवल मानव
वरन् पृथ्वी पर रहने  वाले  सभी जीव जंतु और
पेड़ पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है ।
पेड़  जीव  है आसरा ,
               जीव  जंतु  आधार ।
छाया  शीतल  देत है,
               फलते  पर  उपकार ।।
पेड़ पौधे सम्पूर्ण प्रकार से बहुत उपयोगी है । यह 
किसी भी  प्रकार से हमारे लिए उपयोगी सिद्ध है।
यह हमें छाया ,फल ,फूल जडी़ बुटी शीतलसौम्य
हवा ,प्राण दायिनी वायु देती है । मिट्टी  उपजाऊ
बनाती है  । हानि कारक गैस कार्बन डाई आक.
को ग्रहण करती है , वर्षा को आकर्षत करती है ।
वृक्ष लगा कर पालना , 
               रखना इसका ध्यान ।
मर्म  यही  है  जानना ,
                नित्य  रहे  ये  भान ।।
मनुष्य  को  अपने  हित  का भान रखते हुए पेड़
पौधों की  सुरक्षा  एवं  संरक्षण  का ध्यान रखना 
चाहिए । 
पेड़ पौधे की सुरक्षा में ही समुचे मानव जाति का
कल्याण निहित है ।
पेड़ नहीं कुछ मांगता ,
                देत  नित्य  दिन  रात ।
मनुज नहीं क्यों मानता ,
                निज हित की तू बात ।।
प्राचीन काल में लोग पेड़ पौधों , जीव जंतुओं को 
देवी देवता मान कर उनकी पूजा अराधना  किया
करते थे और किसी अनिष्ट के भय से  उन्हें कभी
नुकसान नहीं पहुंचाते थे ।
                आज स्वार्थ में नर अंधा हो चुका है।
उन्हें अपने हित का भी ख्याल नही है ।पर्यावरण
का नुकसान करता चला जा रहा है  ।

अब ना मानव तू पेड़ को काट ,
               ऐसे ना कर धरती का उजाड़।
आपदा  कहे  सुन  मेरी  पुकार,
               लगा पेड़ अपनी आदत सुधार ।
                पर्यावरण  की  सुरक्षा  का अभिप्राय
केवल पेड़ पौधे नहीं है । इसके अंतर्गत हमें जल,
स्थल,वायु प्रदुषण को नजर रखते हुए हमें इनसे
होने वाले दुष्प्रभाव सेसजग होकर ही प्रकृति की
संतुलन हेतु  कठोर कदम उठाया जाना चाहिए ।
वृक्ष लगा वसुधा का श्रृंगार करें ,
               ऐसे  ही खुद का बेडा़ पार  करें ।
पौधा रोपण करें इसका संरक्षण ,
               शाकाहार बनें छोडे़ मांस भक्षण ।
               पर्यावरण प्रदुषण को रोकने हेतु
 हमें वन्य ,वन्य जीव संरक्षण , जल सःरक्षण सभी
खनिज संपदा  का   संरक्षण , ऊर्जा  केस्त्रोतों  की 
खोज  एवं  विकास करना  ,  मिट्टी  की  अनायास
हो  त्ररही  उत्खनन  को   रोक अपरदन को रोकना
खाद्य  श्रृंखना  की।  कडी़  को  बचाना , पर्यावरण
संतुलन   हेतु अत्यंत आवश्यक जानकारी जो जन 
मानस  तक ले जाना ही  विश्व पर्यावरण दिवस का 
मुख्य एवं प्रमुख उद्देश्य है l
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व्याख्या  :---
           आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 
हमने  यह लेख चम्पू काव्य में लिखा है ।
           जिसका मूल उद्देश्य लोगों में पर्यावरण  के
प्रति जन जागरुता लाना है । लोगोंं  जागरुक  कर
इसके दुष्प्रभाव को रोकना है ।।
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