Monday, June 15, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- बचपन

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
जिला :-  कांकेर
विषय :- बचपन की खट्टी-मीठी यादें(उत्प्रेक्षा अलंकार)
शीर्षक :- बचपन को ढूंढना बैठा हूँ।

     *बचपन को ढूंढने बैठा हूँ*

यादों की स्मृतियों में 
बचपन को ढूंढने बैठा हूँ,
मानों सागर की गहराइयों में 
मोती खोजने बैठा हूँ।

क्या खूबसूरत पल ना 
चिंता ना परवाह भरे दिन,
मानों उन पलों को फिर 
उसालने बैठा हूँ।

आज गम भी है
 परेशानियाँ भी है,
उन यादों में ही मानों 
दर्द भुलाने बैठा हूँ।

खुले आसमाँ में 
लुकाछिपी का खेल,
शिक्षकों का डांटना,
उन लम्हों को 
अंगार के ऊपर पड़ी राख 
जैसे कुरेदना चाहता हूँ।

भाई-बहनों से झगड़ना,
खिलौनों पर मर मिटना,
सारे वो किस्सों की 
यादों में डूबना चाहता हूँ।

कोई आज वो मेरा 
गुजरा बचपन लौटा दे,
उन पलों को 
जीवन भर के लिए 
पलकों में समेटना चाहता हूँ।

यादों की स्मृतियों में 
बचपन को ढूंढना बैठा हूँ,
मानों सागर की गहराइयों में 
मोती खोजने बैठा हूँ।

व्याख्या :- उपरोक्त कविता में बचपन की यादों को मानों मन के सागर की गहराइयों के भीतर यादों रूपी मोती को खोजने बैठा है।बीते हर पल,वो खेलना,शिक्षकों का डांट खाना, भाई-बहनों का लड़ना,खिलौनों के लिए मर-मिटना सारे उन पलों को पलकों में समेटना चाहता है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)

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