जिला-सरगुजा, छ.ग.
विधा-गीत
विषय-बचपन की खट्टी मीठी यादें
अलंकार- उत्प्रेक्षा अलंकार
शीर्षक- *बचपन की याद सुहानी*
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गीत
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बचपन की याद सुहानी,
बिसर गई *ज्यों* साँवरिया की।
अधरों में प्यास लिए,
रंग गई *मानो* सब सखियन की।
फिर से पुकारे
नटखट बचपन।
चली गगन तक
हुई सिहरन सी।
टूट गये सब खेल खिलौने,
*ज्यों* बिखरे सपने नयनन की।
बचपन की...
छूट गये रिश्ते नाते,
घड़ी आई जब से यौवन की।
नीर भरे छलके नैना,
बात कहूँ क्या अब अँसुवन की।
साँझ ढले पट खोले *जानो* ,
आहट होती बिन पैंजन की।
बचपन की...
छोटी -छोटी चाह रही
बाट जोहें तब बड़ा होने की।
गुड़ियों की शादी में
छवि दिखे खुद के जीवन की।
चुपके से ओझल घड़ियाँ
*मानो* नहीं वापस आने की।
बचपन की...
अर्चना पाठक 'निरंतर'
अम्बिकापुर
छत्तीसगढ़
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