Monday, June 15, 2020

छत्तीसगढ़ के सरगुजा से अर्चना पाठक की रचना- बचपन

कवयित्री का नाम-अर्चना पाठक 
जिला-सरगुजा, छ.ग. 
विधा-गीत
विषय-बचपन की खट्टी मीठी यादें
अलंकार-  उत्प्रेक्षा अलंकार

शीर्षक- *बचपन की याद सुहानी* 
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गीत
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बचपन की याद सुहानी,
बिसर गई *ज्यों* साँवरिया की। 
अधरों में प्यास लिए,
 रंग गई *मानो* सब सखियन की। 

फिर से पुकारे 
नटखट बचपन।
चली गगन तक 
हुई सिहरन सी। 
टूट गये सब खेल खिलौने, 
 *ज्यों* बिखरे सपने नयनन की। 
बचपन की... 

छूट गये रिश्ते नाते,
घड़ी आई जब से यौवन की। 
नीर भरे छलके नैना, 
बात कहूँ क्या अब अँसुवन की। 
साँझ ढले पट खोले *जानो* , 
आहट होती बिन पैंजन की। 
बचपन की... 

छोटी -छोटी चाह रही
बाट जोहें तब बड़ा होने की। 
गुड़ियों की शादी में
छवि दिखे खुद के जीवन की। 
चुपके से ओझल घड़ियाँ
 *मानो* नहीं वापस आने की। 
बचपन की... 

अर्चना पाठक 'निरंतर' 
अम्बिकापुर 
छत्तीसगढ़

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