पता - पेंडरवानी , बालोद ,छ.ग.
विधा - कविता (छत्तीसगढ़ी में)
शीर्षक - यादें बचपन की
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यादें बचपन की
गिल्ली -डंडा , बाटी - भौरा,
जम्मो संगी मितान ,
खेलन - खेल बर- पीपर तरी ,
दउड़-दउड़ मैदान,
अच्छा- बुरा नई समझन ,
जब रेहेन नादान ,
फेर नासमझी के दिन में संगी ,
सिमटे हे जहान ,
दांव देवत - लेवत ,
झगड़न अउ चीड़हावन ,
उही करा घमासान ,
अउ उही मेर मिल जावन ,
गर्मी दिन म , तरिया म ,
कई घंटा डुबकी लगावन ,
रेस -टीप खेल संगे-संग ,
भईसामन ल तउरावान ,
जाम अउ चिरईजाम ,
जम्मो कच्चा -पक्का खावन ,
सिलपट्टा म पीस कूट के ,
अमली के लाटा बनावन ,
बचपन के दिन बड़ सुघ्घर संगी ,
मानो सरग के सुख हम पावन ,
जेन डाहर मत जाहू बरजे ,
उही डाहर मा जावन ,
गांव के चारो मुड़ा ,
रुख-राई जंगल कस छांव ,
घाम - घाम म घूम के मैं तो ,
चिरई जाम बन जांव ,
गारी सुनके रे संगी ,
खावन जम्मो हकन के ,
बाड़ी वाला चिल्लावत दउड़े ,
याद आथे वो बचपन के ,
बारिस म भींग-भींग ,
डोंगा बनावन मन के ,
चिखला कस मिल के राहन ,
याद आथे बचपन के ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
bahut sundar
ReplyDeletebachpan ki yaad aa gai