स्थान___नवापाराखुर्द/सकती
जिला_जांजगीर_चाम्पा
राज्य__छत्तीसगढ़
विधा---गीत
शीर्षक---पेड़ हमारे शुभचिंतक
व्याख्या____प्रस्तुत गीत चंपू काव्य मय रचना अन्तर्गत गद्य एवं पद्य विधा में समाहित पेड़ हमारे शुभचिंतक शीर्षक इसमें वार्ता के साथ मां शारदे की वंदना की गई है ।
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पेड़ हमारे शुभचिंतक
मनुष्य-आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मेरे मन में सब की मन की बात जानना चाहिए,ये प्रश्न जागृत हो गयाऔर इसी प्रश्न के उत्तर के लिए हे वृक्षों मैं आप सबके पास आया हूं
जो भी आप सबके मन में हमारे लिए अर्थात मनुष्यों के लिए जो भी बात होगी बिना कुछ छुपाये कहोगे-
एक पेड़-हमारे बारे में क्या जानना चाहते हो ?क्यों जानना चाहता हो ?जानने से क्या होगा ?
मनुष्य-एक साथ कई प्रश्न होगा तो मैं जवाब नहीं दे पाऊंगा।
एक एक प्रश्न अगर सामने आएंगे तो आशा है मैं जवाब दे पाऊं गा ।
एक पेड़-मेरा पहला प्रश्न-हमारे बारे में क्या जानना चाहते हो ? इसका ही पहले जवाब दे दो ।
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मनुष्य_जवाब देने से पहले मैं इस शुभ कार्य का प्रारंभ मां सरस्वती की वंदना से करता हूं, उसके बाद आप का जो प्रश्न है उसका जवाब दूंगा ।
एक पेड़ _ठीक है ।
मनुष्य_शारदे माता की जय ।
जय जय सरस्वती, वीणा धारिणी मां ।
जय जय सरस्वती, अज्ञान निवारिणि मां ।
हम तेरी ध्यान करें,मन से गुणगान करें ।
मन में बसा है अंधकार,दूर कर आह्वान करें ।
जय जय सरस्वती, सबसे उदारिणी मां ।
तुझे शीश झुकाते हैं,दुख दर्द सुनाते हैं ।
कर हम पर तू कृपा,हाथ अपना फैलाते हैं ।
जय जय सरस्वती, इच्छित प्रदायिनी मां ।
तू कमल पर विराजे, हाथों सप्त सुर साजे ।
सुशोभित स्वर्ण सर ताजे, करें मन मोहित रागें ।
जय जय सरस्वती, संगीत साजिनी मां ।
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