Saturday, June 13, 2020

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- बचपन

रचनाकार- सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला- बेमेतरा
विधा- मुक्त छंद कविता
शीर्षक- बचपन आज और कल



अपने बचपन के दिन,
होते थे क्या दिन।
दादा दादी संग रहते थे,
खूब कहानियां सुनते थे।
और गर्मी की छुट्टियों में,
नाना नानी के घर जाते।
सभी भाई बहन मिलजुल कर,
कई खेल खिलौने खेलते।
बहुत याद आते हैं हमको,
वो बचपन के दिन।
बहुत हंसाते बहुत रुलाते,
थे बचपन के वो दिन।                       
*******************
आज का बचपन बोझ का बचपन,
कैसा है ये बचपन।
स्कूल की पढ़ाई से समय मिले तो,
ट्यूएशन का है टेंशन।
उसके बाद भी मोबाईल गेम भी,
चाहिए आज की बचपन को।
और समय मिल जाए तो,
कार्टून शो भी जरूरी है इसको।
इनको नहीं मिल रहा है,
दादा दादी का प्यार।
और ना ही मिल रहा है,
नाना नानी का दुलार।
तो फिर सोचने की बात है,
कौन भरेगा इनके जीवन में नैतिक शिक्षा अपार.......

सूर्य प्रकाश पाटिल

2 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...